सच कहूँ सच सराब जैसा है
तेरा दिखना भी ख़्वाब जैसा है
आज के दौर का न समझें मुझे
दिल पुरानी किताब जैसा है
कर रहे हो तो ठीक से कर लो
क्या ये पर्दा नक़ाब जैसा है
वो हसीं है है ये तो सच लेकिन
उस का मिलना अज़ाब जैसा है
आग से खेलता है वो 'आक़िब'
और तू है कि आब जैसा है
— Aqib khan















