सोचते ये हो के ता-उम्र गुज़ारा होगाजो किसी का न हुआ ख़ाक तुम्हारा होगाइस भरम में है तिरे चाहने वाले अब भीलब थे ख़ामोश मगर दिल ने पुकारा होगाबस इसी बात ने हम को न कहीं का छोड़ाजो हमारा है वो सारा ही हमारा होगाहम ने ये सोच के मैदान न छोड़ा 'आक़िब'अपनी क़िस्मत का भी कोई तो सितारा होगा— Aqib khan