हफ़्त-क़ुल्ज़ुम पे ग़ज़ल कहनी है
तेरे कुमकुम पे ग़ज़ल कहनी है
है बहुत चीज़ें मगर मुझ को तो
आदतन तुम पे ग़ज़ल कहनी है
गीत जो तुम को लुभाते हैं जी
उस तरन्नुम पे ग़ज़ल कहनी हैं
जिस सहारे मैं ग़ज़ल कहता था
उस तलातुम पे ग़ज़ल कहनी है
— Alankrat Srivastava
तेरे कुमकुम पे ग़ज़ल कहनी है
है बहुत चीज़ें मगर मुझ को तो
आदतन तुम पे ग़ज़ल कहनी है
गीत जो तुम को लुभाते हैं जी
उस तरन्नुम पे ग़ज़ल कहनी हैं
जिस सहारे मैं ग़ज़ल कहता था
उस तलातुम पे ग़ज़ल कहनी है
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