शे'र सुन कर न यूँँ तुम लजाना सनमअपने बच्चों को इनको सुनाना सनमरूठ जाऊँ मैं तुम से कभी भी अगरआ के तुम, तालु में, गुदगुदाना सनम— Alankrat Srivastava