qaid se baahar main aanaa chahta hooñ | क़ैद से बाहर मैं आना चाहता हूँ

  - Amaan Pathan

क़ैद से बाहर मैं आना चाहता हूँ
आज फिर से मुस्कुराना चाहता हूँ

हारने की हर वजह है सामने पर
जीतने का इक बहाना चाहता हूँ

रात हो कितनी ही काली ख़त्म होगी
इस ग़ज़ल में ये बताना चाहता हूँ

मैं ख़ुदा बेबस हूँ लेकिन तू नहीं है
फिर तेरी चौखट पे आना चाहता हूँ

सब के चेहरों पर यहाँ सौ सौ मुखौटे
मैं अब इन से दूर जाना चाहता हूँ

मैंने अपनी जान की बाज़ी लगा दी
हार कर तुझको हराना चाहता हूँ

काश मिल जाएँ पुराने यार फिर से
फिर पुराने गीत गाना चाहता हूँ

अब न घर टूटे किसी आशिक़ का मौला
मैं बस अपना घर बसाना चाहता हूँ

जा निकल जा 'इश्क़ अब तू दिल से मेरे
तुझ से मैं पीछा छुड़ाना चाहता हूँ

  - Amaan Pathan

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