जब उनकी आग़ोश में थे
हम कब अपने होश में थे
दहकी दहकी साँसें थीं
यानी वो भी जोश में थे
झुमके करते सरगोशी
वो जो तेरे गोश में थे
आँखें बयाँ करती थी जो
लफ़्ज़ लब-ए-ख़ामोश में थे
अरमानों के फूल 'अनीस'
कितने दिल-ए-मदहोश में थे
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