मैं सोता हूँ तो ये आकर झिंझोड़ देता है
तेरा ख़याल मेरा ख़्वाब तोड़ देता है
वो आज़माता है यूँँ ज़ोर मुझपे अक्सर ही
मिला के हाथ कलाई मरोड़ देता है
यूँँ चीरता है मेरे दिल को बेरुख़ी से वो
कि जैसे दूध में नींबू निचोड़ देता है
मैं इक खिलौने की मानिंद हूँ अब उसके लिए
वो तोड़ता है मुझे और जोड़ देता है
वो नाम मेरा मिटाता तो दिल से है लेकिन
है नाम जिस पे वरक़ भी तो मोड़ देता है
वो खींच लेता है किरदार बीच में अपना
कहानी मेरी अधूरी ही छोड़ देता है
सज़ा-ए-मौत वो करता है मेरी यूँँ एलान
'अनीस' नोक-ए-क़लम लिख के तोड़ देता है
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