main sota hooñ to ye aakar jhinjhod deta hai | मैं सोता हूँ तो ये आकर झिंझोड़ देता है

  - Anis shah anis

मैं सोता हूँ तो ये आकर झिंझोड़ देता है
तेरा ख़याल मेरा ख़्वाब तोड़ देता है

वो आज़माता है यूँँ ज़ोर मुझपे अक्सर ही
मिला के हाथ कलाई मरोड़ देता है

यूँँ चीरता है मेरे दिल को बेरुख़ी से वो
कि जैसे दूध में नींबू निचोड़ देता है

मैं इक खिलौने की मानिंद हूँ अब उसके लिए
वो तोड़ता है मुझे और जोड़ देता है

वो नाम मेरा मिटाता तो दिल से है लेकिन
है नाम जिस पे वरक़ भी तो मोड़ देता है

वो खींच लेता है किरदार बीच में अपना
कहानी मेरी अधूरी ही छोड़ देता है

सज़ा-ए-मौत वो करता है मेरी यूँँ एलान
'अनीस' नोक-ए-क़लम लिख के तोड़ देता है

  - Anis shah anis

Bachpan Shayari

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