abhii to itnaa andhera nazar nahin aata | अभी तो इतना अँधेरा नज़र नहीं आता

  - Anis shah anis

अभी तो इतना अँधेरा नज़र नहीं आता
तो साथ क्यूँ मेरा साया नज़र नहीं आता

इन आँखों से ये ज़माना तो देख सकता हूँ
बस एक अपना ही चेहरा नज़र नहीं आता

जब एक अंधा अँधेरे में देख लेता है
मुझे उजालों में क्या क्या नज़र नहीं आता

बँधी यक़ीन की पट्टी हमारी आँखों पर
सो छल फ़रेब या धोका नज़र नहीं आता

जो दिख रहे हैं वो चाबी के सब खिलौने हैं
यहाँ तो कोई भी ज़िंदा नज़र नहीं आता

तराशे बुत की जो ता'रीफ़ करते हैं उनको
हमारे हाथ का छाला नज़र नहीं आता

अभी तो फैली यहाँ धुंध इतनी नफ़रत की
किसी को प्यार का रस्ता नज़र नहीं आता

'अनीस' यूँँ तो हज़ारों से रोज़ मिलता हूँ
मगर मुझे कोई तुम सा नज़र नहीं आता

  - Anis shah anis

Dushman Shayari

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