haath mere hain bandhe haath milaaun kaise | हाथ मेरे हैं बंधे हाथ मिलाऊँ कैसे

  - Anis shah anis

हाथ मेरे हैं बंधे हाथ मिलाऊँ कैसे
पास हो कर भी तेरे पास मैं आऊँ कैसे

मेरे अंदर भी मचलता है समुंदर लेकिन
तेरे होंटों की अभी प्यास बुझाऊँ कैसे

वक़्त ने डाल दी ज़ंजीर मेरे पैरों में
दौड़ कर तुझ को गले यार लगाऊँ कैसे

ज़हर-आलूदा मेरे हाथ हुए हैं हमदम
प्यार का जाम भला तुझ को पिलाऊँ कैसे

वक़्त कम और मेरे सामने ये लम्बा सफ़र
तेरी ज़ुल्फ़ों में हसीं शाम बिताऊँ कैसे

सामने रहती है महबूब की सूरत मेरे
या-ख़ुदा सज्दे में सर अपना झुकाऊँ कैसे

बोझ सर पर है फ़राएज़ का 'अनीस' अब मेरे
फिर बता सर पे तेरे नाज़ उठाऊँ कैसे

  - Anis shah anis

Romance Shayari

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