शून्य हूँ मैं मेरा वक़ार नहीं
तू बिना मेरे भी हज़ार नहीं
मान तेरा बढ़ाने पीछे हूँ
भीड़ में ऐसे ही शुमार नहीं
बोझ सर ले चला नहीं जाता
मैं तभी तो रखूँ उधार नहीं
पैरहन है फटा क़ुबूल मुझे
मुझ को मंज़ूर दाग़दार नहीं
अपने सर से नहीं उतार मुझे
ताज तेरा हूँ कोई भार नहीं
मैं हूँ धागा 'अनीस' मामूली
बिन मेरे तो बनेगा हार नहीं
— Anis shah anis















