तेरी दोस्ती भी कमाल है तेरी दुश्मनी भी मिसाल है
मुझे क़त्ल करता है शौक़ से मेरी मौत पर भी मलाल है
तेरा मुझ पे है ये करम कि तू भी निभा रहा है रिवायतें
मुझे दे रहा है मुआवज़ा मेरे तिफ़्ल का जो ख़याल है
तेरे पास रंग-ए-बहार है मैं तो फूल दौर-ए-ख़िज़ाँ का हूँ
मेरे पास रंग न नूर है तेरे पास हुस्न-ओ-जमाल है
मेरी ज़िंदगी में मआ'नी हैं ये उरूज और ज़वाल के
तू जो साथ था वो उरूज था तुझे खो दिया ये ज़वाल है
तेरे हाथ मेरी ये आबरू तेरे हाथ है मेरी डोर भी
तू कहे अगर तो हराम है तू कहे अगर तो हलाल है
सुन अनीस तू ही था राहबर तेरे हाथ में ही कमान थी
मेरा कारवाँ तो ये लुट गया तेरी रहबरी पे सवाल है
— Anis shah anis















