ज़ेहन में क़ैद किया तुझको तज़क्कुर करके
अब तो कर लेता हूँ दीदार तसव्वुर करके
ज़िंदगी रब ने अता की है मुहब्बत के लिए
यूँँ न बर्बाद इसे कर तू तनफ़्फ़ुर करके
मैंने तो फ़र्ज़ निभाया है समझकर अपना
तू न बेगाना बना मुझको तश्क्कुर करके
अपने बंदों की वो फ़रियाद सुना करता है
तू ख़ुदास तो ज़रा माँग तअव्वुर करके
ढूँढ लेते हैं मुसीबत का कोई हल कुछ लोग
और बर्बाद हुए कितने तफ़क्कुर करके
जीत लेते हैं अज़ाइम से समंदर जो 'अनीस'
डूबते हैं वो किनारों पे तकब्बुर करके
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