वो दोस्त इस लिए ही सँभाला नहीं गया
इक साँप आस्तीन में पाला नहीं गया
देखा है हम ने ख़ूब लगा कर उसे गुलाल
पर उस के दिल से रंग तो काला नहीं गया
इल्ज़ाम मय-कशी का वही अब लगा रहे
हम से तो जिन का जाम भी टाला नहीं गया
नाज़ुक थे पाँव उन के किसी फूल की तरह
काँटे से काँटा हम से निकाला नहीं गया
पुर-नूर उन के हुस्न से ये घर है इस क़दर
वो जा चुके हैं घर से उजाला नहीं गया
मासूम को तड़पते हुए देखा भूख से
उस पल से मेरे मुँह में निवाला नहीं गया
कैसे 'अनीस' देखते हम हार आप की
सिक्का तभी तो हम से उछाला नहीं गया
— Anis shah anis















