चाँद बताऊँ कैसा है
तेरे मुखड़े जैसा है
जैसी नीली ये आँखें
नीलकमल भी वैसा है
गाल पे तेरे प्यारा तिल
काले टीके जैसा है
फूल खिला हो ज्यूँ ताज़ा
तेरा तबस्सुम ऐसा है
झूठे हैं जो कहते हैं
सब कुछ जग में पैसा है
मिल ही जाता है इक दिन
हाँ जैसे को तैसा है
देख रहा हूँ अनीस जिसे
मंज़र सपने जैसा है
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