khushiyaan raqeeb hain ye meraa gham anees hai | ख़ुशियाँ रक़ीब हैं ये मेरा ग़म अनीस है

  - Anis shah anis

ख़ुशियाँ रक़ीब हैं ये मेरा ग़म अनीस है
मेरा है हम सेफ़र मेरा हमदम अनीस है

नाज़ुक मिज़ाज गुल सा मुलायम अनीस है
छूकर तो देख जैसे कि रेशम अनीस है

क्यूँ तुझको लग रहा है कोई बम अनीस है
रब्त-ओ-ख़लूस-ओ-अम्न का परचम अनीस है

दुनिया के जख़्मों की नहीं परवाह अब मुझे
मेरे हर एक जख़्म का मरहम अनीस है

सरसब्ज़ हो उठी है ये हर एक शाख़-ए-दिल
खिलते हैं गुल बहार का मौसम अनीस है

लबरेज़ है ख़ुलूस-ओ-मुहब्बत के आब से
गंग-ओ-जमन की धार का संगम अनीस है

अल्फ़ाज़ घुँघरू बाँध के करने लगे हैं रक़्स
मैं प्यार का हूँ नग़्मा तो सरगम अनीस है

होठों पे क्यूँ नुमूद-ए-तबस्सुम नहीं है आज
कुछ बात है 'अनीस' जो बरहम अनीस है

  - Anis shah anis

Gham Shayari

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