मोम तो हूँ नहीं जो आग से डर जाऊँगा
मैं तेरी आग में कुंदन सा निखर जाऊँगा
मैं तो दरिया हूँ रवानी है मेरी फ़ितरत में
तूने रोका तो तेरे सर से गुज़र जाऊँगा
कितने ही शम्स-ओ-क़मर साथ मेरे चलते हैं
रौशनी होगी उधर अब मैं जिधर जाऊँगा
तू है नफ़रत का जुनूँ सर पे रहेगा कब तक
मैं मुहब्बत हूँ दिल-ओ-जाँ में उतर जाऊँगा
वक़्त हूँ साथ मुसलसल मेरे चलना है तुझे
हम सेफ़र तेरा नहीं हूँ जो ठहर जाऊँगा
शौक़ से मेरा हर इक ऐब गिनाता जा 'अनीस'
आईना और दिखा और सँवर जाऊँगा
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