कितना आसान ये सफ़र होता

  - Anis shah anis

कितना आसान ये सफ़र होता
हम सेफ़र तू मेरा अगर होता

होता ख़ाना-बदोश मैं भी नहीं
और तू भी न दर-ब-दर होता

हो भी जाता वज़ीर मैं शायद
तू तो पक्का है ताजवर होता

मैं जहाँ के फ़रेब खाता क्यूँँ
तू अगर मेरा मोतबर होता

मेरे टुकड़े भी काम आ जाते
तोड़ने का तुझे हुनर होता

देख चिड़ियों को घोसलों में लगा
काश अपना भी कोई घर होता

दर्द होता 'अनीस' सीने में
तेरे अशआर में असर होता

  - Anis shah anis

More by Anis shah anis

As you were reading Shayari by Anis shah anis

Similar Writers

our suggestion based on Anis shah anis

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari