पहले इनकार कई बार हुआ करता था
तब कहीं बा'द में इक़रार हुआ करता था
अपनी भी ज़िंदगी में प्यार हुआ करता था
पहले इतवार भी इतवार हुआ करता था
तितलियाँ रक़्स गुलों पर भी किया करती थीं
अपना दिल भी कभी गुलज़ार हुआ करता था
लोग सुनते ही अयादत को चले आते थे
मैं ज़रा सा कभी बीमार हुआ करता था
मेरी पहचान हुआ करता था ये नाम मेरा
कौन सा पहले ये आधार हुआ करता था
उस की धड़कन की सदाएँ भी सुनी हैं मैं ने
मैं जो उस के गले का हार हुआ करता था
दर-ब-दर आज भटकता हूँ यक़ीनन मैं अनीस
हाँ कभी मेरा भी घर-बार हुआ करता था
— Anis shah anis















