tumhaare rukhsaar yuñ damakte gulon pe aaya shabaab jaise | तुम्हारे रुख़सार यूँँ दमकते गुलों पे आया शबाब जैसे

  - Anis shah anis

तुम्हारे रुख़सार यूँँ दमकते गुलों पे आया शबाब जैसे
लबों पे सुर्ख़ी यूँँ लग रही है खिला हो ताज़ा गुलाब जैसे

इन्हें न समझो कोई शराबी नज़र मिली तो बहक गए हैं
तुम्हारी आँखें हैं जाम कोई भरी हो इन
में शराब जैसे

फ़ज़ा में सरगम घुली हुई है तुम्हारी बातों में है तरन्नुम
खनक रही है तुम्हारी पायल कि बज रहा हो रबाब जैसे

तुम्हारा एहसास पास दिल के मैं यूँँ तसव्वुर में खो गया हूँ
उभरता नज़रों में अक्स ऐसे कि सहरा में हो सराब जैसे

बदलते रहते हैं करवटें हम 'अनीस' कैसे कटेंगी रातें
बिछड़ के हम जी रहे हैं ऐसे मिला हो हमको अज़ाब जैसे

  - Anis shah anis

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