जब ज़ियादा चढ़ाव होता है
रास्तों में घुमाव होता है
हो ही जाता है दूर लोगों से
तेज़ जिस का भी भाव होता है
पेड़ बचते हैं आँधियों में वो
जिन
में थोड़ा झुकाव होता है
टूट जाती है डोर रिश्तों की
जब ज़ियादा तनाव होता है
काट लेते हैं सर्द रातें हम
भूख का जो अलाव होता है
मान लेते हैं हम तो दुश्मन का
जो भी अच्छा सुझाव होता है
तीर तलवार से ज़ियादा तो
गहरा शब्दों से घाव होता है
याद आए अवाम तब ही अनीस
देश में जब चुनाव होता है
— Anis shah anis















