dosti se pyaar tak sab is qadar achha laga | दोस्ती से प्यार तक सब इस क़दर अच्छा लगा

  - Prashant Arahat

दोस्ती से प्यार तक सब इस क़दर अच्छा लगा
आप से तुम तुम से तू तक का सफ़र अच्छा लगा

इक तेरे झुमके क़यामत और डिंपल गाल के
देखना साड़ी में तुझको आँख भर अच्छा लगा

ख़्वाब में भी ख़्वाब देखा तू है मेरे साथ में
क्या बताएँ साथ तेरा किस क़दर अच्छा लगा

प्यार ही तो याद रखने का ज़री'आ है यहाँ
कौन किसको बे-सबब यूँँ उम्र भर अच्छा लगा

जो परिंदे आसमाँ में उड़ रहे थे अब तलक
शाम होते ही उन्हें फिर से शजर अच्छा लगा

जो अकेला छोड़कर मुझको गया था एक दिन
फिर वो मेरे पास आया लौटकर अच्छा लगा

शा'इरी सुनके ही डीएम कर रही हैं लड़कियाँ
पूछता 'अरहत' है क्या मैं इस क़दर अच्छा लगा

  - Prashant Arahat

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