जो कहता था ख़ुद से बाहर जाएँगे
उस के बदले में हम भीतर जाएँगे
पहले दिल पर दस्तक देंगे घंटों तक
उस के बा'द में फिर हम अंदर जाएँगे
हम दुनिया के ऐसे शापित शाइ'र हैं
बात न कुछ कह पाए तो मर जाएँगे
सपने में भी हाल न पूछा ज़िंदा हो
क्या लगता है अब उन के घर जाएँगे
ता'ने देने वालों से क्या मतलब है
हम ने जो सोचा है वो कर जाएँगे
— Prashant Arahat















