KHud muhabbat ke safar men shauq se aa.e ho tum | ख़ुद मुहब्बत के सफ़र में शौक़ से आए हो तुम

  - Prashant Arahat

ख़ुद मुहब्बत के सफ़र में शौक़ से आए हो तुम
क्या हुआ अब इस तरह किस सोच में बैठे हो तुम

इस उदासी का सबब हम से कभी पूछा नहीं
और कहते हो बहुत कम आजकल हँसते हो तुम

ख़्वाब में ही देखता हूँ ख़ुद को उसके साथ में
और माँ कहती है बेटा देर तक सोते हो तुम

एक शिकवा है मुझे वो हाल मेरा पूछता
फ़ोन करता और कहता यार अब कैसे हो तुम

पूछता था कल कोई अरहत ये शाहाबाद है
एक हरदोई का कस्बा क्या वहीं रहते हो तुम

  - Prashant Arahat

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