ye kahaanii ishq kii sabko bataani hai nahin | ये कहानी इश्क़ की सबको बतानी है नहीं

  - Prashant Arahat

ये कहानी इश्क़ की सबको बतानी है नहीं
ये तो सच्चा इश्क़ है वैसे कहानी है नहीं

चीख़कर सब सेे कहा था यार हज़रत जौन ने
इश्क़ फ़ानी है ये कोई जावेदानी है नहीं

रोज़ तुम आती रहो मिलती रहो मुझ सेे यहाँ
इश्क़ क़तरा है ये दरिया की रवानी है नहीं

सब हमारे सामने महफ़िल से उठकर जा रहे
यार पहले तू गई अब नींद आनी है नहीं

अब दलीलें इश्क़ में कैसे मैं तेरी मान लूँ
आज तक मैंने किसी की बात मानी है नहीं

  - Prashant Arahat

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