एक तस्वीर हू-ब-हू तेरी
रात दिन करते जुस्तजू तेरी
ख़ुद को भी भूल कर चले आए
ख़त्म है दिल से आरज़ू तेरी
मुझ को अपना पता नहीं मुरशिद
मैं करूँ किस से गुफ़्तगू तेरी
तुझ को गर आरज़ू नहीं मेरी
क्यूँ भला होगी आरज़ू तेरी
जिस ने दिल के यक़ीं को मार दिया
बैठा है क्यूँ वो क़िबला-रू तेरी
— Arohi Tripathi















