हर घड़ी इंतिज़ार करती हूँ
प्यार जो बे-शुमार करती हूँ
दूर हूँ मानती हूँ मैं तुम से
अब भी तुम से ही प्यार करती हूँ
मुझ को चाहत नहीं किसी की अब
तुम को आख़िर क़रार करती हूँ
— Arohi Tripathi
प्यार जो बे-शुमार करती हूँ
दूर हूँ मानती हूँ मैं तुम से
अब भी तुम से ही प्यार करती हूँ
मुझ को चाहत नहीं किसी की अब
तुम को आख़िर क़रार करती हूँ
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