main tumhein ab chhod bhi sakti nahin hooñ | मैं तुम्हें अब छोड़ भी सकती नहीं हूँ

  - Arohi Tripathi

मैं तुम्हें अब छोड़ भी सकती नहीं हूँ
हाँ ये रिश्ता तोड़ भी सकती नहीं हूँ

जिस वरक पर नाम तेरा लिख दिया है
वो वरक मैं मोड़ भी सकती नहीं हूँ

कर दिया बर्बाद मैंने 'इश्क़ में यूँँ
हाथ तुझ सेे जोड़ भी सकती नहीं हूँ

तुम सेे वा'दा कर लिया ज़िंदा रहूँगी
दर्द में सर फोड़ भी सकती नहीं हूँ

मार डाला ख़ुद को मैंने इस तरह से
ख़ुद को अब झिंझोड़ भी सकती नहीं हूँ

  - Arohi Tripathi

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