मुझे ही मैं हराना चाहती हूँ
तुम्हें दुखड़ा सुनाना चाहती हूँ
भरी महफ़िल तुझे बदनाम करके
तिरा चेहरा दिखाना चाहती हूँ
पुराने से जो बेहतर सोचता हो
नया ऐसा दिवाना चाहती हूँ
मिला उम्दा मगर 'आला नहीं है
वही फिर अब पुराना चाहती हूँ
बहुत ढूँढा मगर फिर भी न पाया
वही हक़ था बताना चाहती हूँ
हजारों मिल तो जाएँगे मगर मैं
तुम्हारे पास आना चाहती हूँ
तुम्हारा होना ही दिल को सुकूँ है
ज़रा अब मुस्कुराना चाहती हूँ
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