mujhe hi main har | मुझे ही मैं हराना चाहती हूँ

  - Arohi Tripathi

मुझे ही मैं हराना चाहती हूँ
तुम्हें दुखड़ा सुनाना चाहती हूँ

भरी महफ़िल तुझे बदनाम करके
तिरा चेहरा दिखाना चाहती हूँ

पुराने से जो बेहतर सोचता हो
नया ऐसा दिवाना चाहती हूँ

मिला उम्दा मगर 'आला नहीं है
वही फिर अब पुराना चाहती हूँ

बहुत ढूँढा मगर फिर भी न पाया
वही हक़ था बताना चाहती हूँ

हजारों मिल तो जाएँगे मगर मैं
तुम्हारे पास आना चाहती हूँ

तुम्हारा होना ही दिल को सुकूँ है
ज़रा अब मुस्कुराना चाहती हूँ

  - Arohi Tripathi

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