dastaan khatm hone waali hai | दास्ताँ ख़त्म होने वाली है

  - Arohi Tripathi

दास्ताँ ख़त्म होने वाली है
ख़्वाब आँखों में हमने पाली है

चाँद पर दाग़ होना लाज़िम है
रात मेरी वजह से काली है

वो अगर चाह ले तो सब कुछ हो
बात उसकी किसी ने टाली है

मैं मोहब्बत समझ रही तेरी
ये मोहब्बत भी तेरी ज़ाली है

ज़िंदगी मौत के बराबर है
सबने आँखों में धूल डाली है

मैं पुकारूँ कभी चले आना
हाँ तुम्हारी जगह ये ख़ाली है

  - Arohi Tripathi

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