uske maathe pe kisi hi aur ka sindoor hai | उसके माथे पे किसी ही और का सिन्दूर है

  - Arohi Tripathi

उसके माथे पे किसी ही और का सिन्दूर है
दिल के अंदर है मगर लगता हमेशा दूर है

एक वादे पे गुज़र जाती हमारी ज़िंदगी
जानता हूँ प्यार में वो आज भी मजबूर है

सच यही दुनिया मोहब्बत को समझती ही नहीं
एक होने ही नहीं दे 'इश्क़ में दस्तूर है

और चाहत भी नहीं है और ख़्वाहिश भी नहीं
एक जन्नत है जहाँ में एक मेरी हूर है

  - Arohi Tripathi

Sach Shayari

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