kabhi mujh ko khanakti choodiyaan dushman sii lagti hain | कभी मुझ को खनकती चूड़ियाँ दुश्मन सी लगती हैं

  - Bhoomi Srivastava

कभी मुझ को खनकती चूड़ियाँ दुश्मन सी लगती हैं
तुम्हें सुनते हुए सब बोलियाँ दुश्मन सी लगती हैं

भले इक दो क़दम के फ़ासले पे तुम खड़े हो पर
मुझे इतनी भी तुम से दूरियाँ दुश्मन सी लगती हैं

तुम्हारे इर्द दुनिया ख़ूबसूरत है मगर मुझ को
तुम्हारे पास बैठी लड़कियाँ दुश्मन सी लगती हैं

मुझे सत्तर बरस के वक़्त भी सुंदर ही कहना तुम
हसीनाओं को उस पल झुर्रियाँ दुश्मन सी लगती हैं

पसंदीदा हो जितनी भी तुम्हारी आँखें मुझ को पर
नज़र-अंदाज़ करती पुतलियाँ दुश्मन सी लगती हैं

तुम्हारे बिन नज़ारों की नुमाइश भी नहीं होती
तुम्हारे बिन ये नदियाँ घाटियाँ दुश्मन सी लगती हैं

  - Bhoomi Srivastava

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