duniya se maa bacche ko zyaada jaantius nau maheenon ko vahii pahchaanti | दुनिया से माँ बच्चे को ज़्यादा जानती

  - "Dharam" Barot

दुनिया से माँ बच्चे को ज़्यादा जानती
उस नौ महीनों को वही पहचानती

तुझ को मोहब्बत है मुकम्मल मुझ से ही
क्यूँ जानकर भी ये नहीं तू मानती

उस रूप पर योगी के सीता का यक़ीन
सीता वगरना ख़ुद ही रेखा तानती

खाई थी उसने चोट दिल पर गहरी सो
हर एक रिश्ता अच्छे से वो छानती

चुपके से दोनों की मुलाक़ातों का दौर
जिसने किया है 'इश्क़ वो ये जानती

  - "Dharam" Barot

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