समझने को तो मेरे यार तू कुछ भी समझ ले
जताऊँगा मैं तुझ से प्यार तू कुछ भी समझ ले
बताया है उन्होंने जो बहुत आगे गए थे
लगी थी जीत भी इक हार तू कुछ भी समझ ले
समझ आएगा पर होगा नहीं तेरे मुताबिक़
यही है ज़िंदगी का सार तू कुछ भी समझ ले
ग़लत का काम ही है जल्द आगे ले गया था
बहुत था दिल पे इस से भार तू कुछ भी समझ ले
मुझे ठोकर सिखाती और कोई क्या सिखाए
मैं मेरे फ़न का हूँ फ़नकार तू कुछ भी समझ ले
— "Dharam" Barot















