तुम सब सेे अच्छे हो तो मेरे बारे थोड़ा सोच लोमुश्किल है तो ज़्यादा नहीं धीरे से थोड़ा सोच लोये ज़ाविया भी खोल दो हो ख़ानदानी जो रईसभूखे को अपना खाना दे पाओगे थोड़ा सोच लो— "Dharam" Barot