Deenbandhu Jaiswal

Deenbandhu Jaiswal

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Deenbandhu Jaiswal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Deenbandhu Jaiswal's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

दरख़्तों से अलग हो कर हरे रहते नहीं पत्ते नई नस्लों को ये शीशा दिखाने की ज़रूरत है — Deenbandhu Jaiswal
मिट्टी के घर को जैसे ये बरखा नहीं पसंद मुझ को भी मेरी जाँ तिरा रोना नहीं पसंद — Deenbandhu Jaiswal
मैं कहाँ ये कह रहा फलदार होना चाहिए था कम-से-कम ये पेड़ साया-दार होना चाहिए था — Deenbandhu Jaiswal

Ghazal

लाख चाहे बाइस-ए-आज़ार होना चाहिए था दिन बदलने का मगर आसार होना चाहिए था मैं कहाँ ये कह रहा फलदार होना चाहिए था कम से कम ये पेड़ साया-दार होना चाहिए था फूल हो बस इस लिए तुम रोज़ मसले जा रहे हो वक़्त जैसा है तुम्हें तो ख़ार होना चाहिए था जिस तरह झूठी ख़बर को आप फैलाते यहाँ हैं आप को इंसाँ नहीं अख़बार होना चाहिए था डूबती कश्ती नहीं गर आप जो थोड़ा समझते आप को तूफ़ाँ नहीं पतवार होना चाहिए था ज़ीस्त भर इक शख़्स से आगे नहीं कुछ सोच पाना इश्क़ में क्या यूँँ कोई लाचार होना चाहिए था जिस तरह से धर्म का नुक़सान होता जा रहा है अब तलक तो कल्कि का अवतार होना चाहिए था — Deenbandhu Jaiswal
फ़िक्र-ए-फ़र्दा को हटाओ मुस्कुराओ आज में तुम लौट आओ मुस्कुराओ चाह सागर की न तुम को चैन देगी इक नदी में ख़ुश हो जाओ मुस्कुराओ जीतने में बा-रहा भी क्या मज़ा है ख़ुद कभी ही हार जाओ मुस्कुराओ फूल पत्तें छोड़ जाएँ साथ जिस का उस शजर को घर बनाओ मुस्कुराओ अब्र भीतर के पिघलने है ज़रूरी अश्क भी थोड़े बहाओ मुस्कुराओ तीरगी हर सम्त है तो क्या हुआ फिर बन के जुगनू फैल जाओ मुस्कुराओ हर कली हर फूल तुम पर मर मिटेंगे भँवरे सा बस गुनगुनाओ मुस्कुराओ जो ज़माना सोचता है तुम भी सोचो बाज इस हरकत से आओ मुस्कुराओ हाथ मेरा देखते बोला मुनज्जिम क्या ही बोलूँ छोड़ो जाओ मुस्कुराओ जा रहा स्कूल उस का एक बच्चा अब तो उस को भूल जाओ मुस्कुराओ मानता हूँ है कठिन पर यार मेरे हो कभी तो आज़माओ मुस्कुराओ — Deenbandhu Jaiswal
जंगल दरिया पर्वत सागर सहरा अच्छा लगता है साथ में जब वो होती है हर रस्ता अच्छा लगता है प्यार मोहब्बत की बातें तो सबकी अच्छी लगती हैं वो लड़ती भी है तो उस का लड़ना अच्छा लगता है उस की हाथ के मरहम से ये धीरे-धीरे भरते है ज़ख़्मों को भी शायद उस का छूना अच्छा लगता है बिंदिया चूड़ी काजल गजरा उस के बिन सब फीके हैं हर ज़ेवर मेकअप को उस पर सजना अच्छा लगता है शे'र ग़ज़ल या नज़्में हो मैं इसीलिए तो लिखता हूँ यार मिरे बस उस को ये सब पढ़ना अच्छा लगता है और किसी से इश्क़ हो दिल को इसीलिए मंज़ूर नहीं आँगन में केवल तुलसी का पौधा अच्छा लगता है अपनी अंतिम इच्छा में भी उस का दीद ही चाहूँ मैं क्या बतलाऊँ वो इक चेहरा कितना अच्छा लगता है — Deenbandhu Jaiswal
नहीं बद-हाल हर इक साल होना भी ज़रूरी है कि मेरा अब ज़रा ख़ुश-हाल होना भी ज़रूरी है ख़ुदा ये बे-रुख़ी तेरी मुझे अब मार डालेगी दुआऍं कुछ का अब इक़बाल होना भी ज़रूरी है सफ़र में क्या नहीं करना है मुझ को जानने को ये मुझे लगता है ऐसा हाल होना भी ज़रूरी है नए आशिक़ को समझाने है अंजाम-ए-मोहब्बत तो मोहब्बत में कभी पामाल होना भी ज़रूरी है कि कब तक रोक पाओगे इन अश्कों को निकलने से तुम्हारे पास अब रूमाल होना भी ज़रूरी है ज़रा सा पंख लगते बाज़ ख़ुद को बोलते हैं जो कि ऐसे मुर्गियों का दाल होना भी ज़रूरी है कहाँ ढूँढूँ मैं वो अब शख़्स जो तब कह रहा था ये तुम्हारी राह में जंजाल होना भी ज़रूरी है — Deenbandhu Jaiswal
समुंदर के इशारों पर ये हलचल हो ही जाती है किनारे पर खड़ी कश्ती भी जल-थल हो ही जाती है बुरा ख़ुद का भी होने से कहाँ मैं रोक पाता हूँ दुआ दुश्मन की कोई हो मुकम्मल हो ही जाती है मियाँ उम्मीद जब तक है कि ज़िंदा आदमी भी है वगरना धड़कनों में रोज़ खल-बल हो ही जाती है किसी तन्हा के हाथों को नहीं जब थामता कोई तो ऐसे हाथ में फिर यार बोतल हो ही जाती है शिकायत है ज़माने को मगर मैं क्या करूँँ मेरी मुहब्बत में कोई लड़की हो पागल हो ही जाती है तअल्लुक़ वज़्न का ऐसा है मेरी पीठ से यारो करूँँ जितना भी कम पर पीठ बोझल हो ही जाती है ज़रूरी भी नहीं होता कि बादल राह में बरसें जिधर मैं पाँव रखता हूँ वो दलदल हो ही जाती है — Deenbandhu Jaiswal