आप के दिल में ठिकाना चाहिए था
कौन सा हम को ख़ज़ाना चाहिए था
मानते है हम ग़लत थे फिर भी लेकिन
आप को भी इक बहाना चाहिए था
बोझ हम ने ज़िन्दगी के तब उठाए
जब हमें बस्ता उठाना चाहिए था
बा'द में दुनिया यही बस बोलती है
आप को पहले बताना चाहिए था
इक ख़ुशी भी दे न पाए माँ-पिता को
वक़्त पर हम को कमाना चाहिए था
मौत आई तब यही अफ़सोस था बस
हर नशे को आज़माना चाहिए था
सोचते हैं मंज़िलों को छोड़ हम को
रास्तों से दिल लगाना चाहिए था
शर्म का क्या ही सियासत में करेंगे
आप को तो बेच आना चाहिए था
— Deenbandhu Jaiswal















