नहीं बद-हाल हर इक साल होना भी ज़रूरी है
कि मेरा अब ज़रा ख़ुश-हाल होना भी ज़रूरी है
ख़ुदा ये बे-रुख़ी तेरी मुझे अब मार डालेगी
दुआऍं कुछ का अब इक़बाल होना भी ज़रूरी है
सफ़र में क्या नहीं करना है मुझ को जानने को ये
मुझे लगता है ऐसा हाल होना भी ज़रूरी है
नए आशिक़ को समझाने है अंजाम-ए-मोहब्बत तो
मोहब्बत में कभी पामाल होना भी ज़रूरी है
कि कब तक रोक पाओगे इन अश्कों को निकलने से
तुम्हारे पास अब रूमाल होना भी ज़रूरी है
ज़रा सा पंख लगते बाज़ ख़ुद को बोलते हैं जो
कि ऐसे मुर्गियों का दाल होना भी ज़रूरी है
कहाँ ढूँढूँ मैं वो अब शख़्स जो तब कह रहा था ये
तुम्हारी राह में जंजाल होना भी ज़रूरी है
— Deenbandhu Jaiswal















