सौंप के अपनी ख़ुशी की चाबी किसी और कोज़िन्दगी में खींच लाए हैं दुखों के दौर कोआँधियों को और तेज़ चलने को कह दो ख़ुदाचाहते हो छीनना गर इक बचे इस ठौर को— Deenbandhu Jaiswal