फ़िक्र-ए-फ़र्दा को हटाओ मुस्कुराओ
आज में तुम लौट आओ मुस्कुराओ
चाह सागर की न तुम को चैन देगी
इक नदी में ख़ुश हो जाओ मुस्कुराओ
जीतने में बा-रहा भी क्या मज़ा है
ख़ुद कभी ही हार जाओ मुस्कुराओ
फूल पत्तें छोड़ जाएँ साथ जिस का
उस शजर को घर बनाओ मुस्कुराओ
अब्र भीतर के पिघलने है ज़रूरी
अश्क भी थोड़े बहाओ मुस्कुराओ
तीरगी हर सम्त है तो क्या हुआ फिर
बन के जुगनू फैल जाओ मुस्कुराओ
हर कली हर फूल तुम पर मर मिटेंगे
भँवरे सा बस गुनगुनाओ मुस्कुराओ
जो ज़माना सोचता है तुम भी सोचो
बाज इस हरकत से आओ मुस्कुराओ
हाथ मेरा देखते बोला मुनज्जिम
क्या ही बोलूँ छोड़ो जाओ मुस्कुराओ
जा रहा स्कूल उस का एक बच्चा
अब तो उस को भूल जाओ मुस्कुराओ
मानता हूँ है कठिन पर यार मेरे
हो कभी तो आज़माओ मुस्कुराओ















