तुम्हें क़ीमत पता होती तो बे-क़दरी नहीं होती
उन्हें पूछो वो जिन के हिस्से में रोटी नहीं होती
ज़रा सा दुख तो होता है परेशानी नहीं होती
कोई अब छोड़ जाता है तो हैरानी नहीं होती
किया ज़ाहिर कि शादी उन से ही करने की ख़्वाहिश है
वो हँसती हैं ज़बाँ से पर कभी हाँ-जी नहीं होती
मिलाऊँगा उन्हें भी आप सब से सोचता हूँ मैं
मगर कब? जब तलक वो आप की भाभी नहीं होती
बहन है आप की तो ख़ुश-नसीबी मान कर चलिए
उन्हें पूछो वो जिन के हाथ पर राखी नहीं होती
हथौड़ा और आरी साथ ले कर चल रहे हैं सब
किसी के पास दिल की क्यूँ कोई चाबी नहीं होती
सुनामी आ गई कैसे बताओ तो ज़रा आँखों
लिखा भी था पलक पर याद तैरानी नहीं होती
मोहब्बत है बड़ी ज़ालिम ये आज़ादी नहीं देती
सज़ा-ए-मौत पुख़्ता हो भी तो फाँसी नहीं होती
लगाए हैं सभी इल्ज़ाम दिल पर 'दिव्य' तुम ने भी
बिछड़ जाने की तुम ने भी कभी ठानी नहीं होती















