aasmaañ aur is zameen ka paas aanaa rah gaya | आसमाँ और इस ज़मीं का पास आना रह गया

  - Divya 'Kumar Sahab'

आसमाँ और इस ज़मीं का पास आना रह गया
माँग में सिंदूर उसके बस लगाना रह गया

वो अगर कहते कभी छत पर बुला लो चाँद को
फिर पकड़ कर हाथ उनका छत पे जाना रह गया

भूल कर आगे बढ़ूँगा तय किया था एक दिन
बढ़ गया आगे ज़माना मैं पुराना रह गया

मौत ही ये शर्त है बस दूर जाने के लिए
दूर उसने कर दिया अब दूर जाना रह गया

ले गए हो दिल मेरा तुम रह गया है प्यार ये
वो तुम्हारे पास कौड़ी है ख़ज़ाना रह गया

वक़्त तो चलता रहा पर कुछ कहीं पर रुक गया
बढ़ गई ये ज़िंदगी पूरा फ़साना रह गया

सोचता हूँ क़ैदस ख़ुद को छुड़ा लाया मगर
अब यहाँ इस क़ैद को ख़ुदस छुड़ाना रह गया

  - Divya 'Kumar Sahab'

Dil Shayari

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