jism men vo mere bankar shvaas bai | जिस्म में वो मेरे बनकर श्वास बैठी है यहाँ

  - Divya 'Kumar Sahab'

जिस्म में वो मेरे बनकर श्वास बैठी है यहाँ
हारने देती नहीं इक आस बैठी है यहाँ

मिल गई वो शर्ट जब वो साथ बैठी थी मेरे
शर्ट पहनी तो लगा वो पास बैठी है यहाँ

देखो सहरा ने बुझाली प्यास अपनी धूप से
ये समंदर कह रहा है प्यास बैठी है यहाँ

मैं कभी करता नहीं अपने लिए भी अब दुआ
सिर्फ़ उसके ही लिए अरदास बैठी है यहाँ

घूमने वो दिल में निकले एक कमरे में घुसे
देखते हैं वो कि उनकी सास बैठी है यहाँ

  - Divya 'Kumar Sahab'

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