nain se ye os utri hai sahaara koi to ho | नैन से ये ओस उतरी है सहारा कोई तो हो

  - Divya 'Kumar Sahab'

नैन से ये ओस उतरी है सहारा कोई तो हो
बुझ गई ये चाँदनी अब शब का तारा कोई तो हो

ओस उतरी थी जहाँ मझधार ही वो बन गई है
अब इधर मझधार के आगे किनारा कोई तो हो

कोई तो ऐसा मिले जिस पर लुटा दूँ क़तरा क़तरा
जो कहे अपना हमें ऐसा हमारा कोई तो हो

कौन कहता है ज़मीं बंजर बरस सकती नहीं है
इस ज़मीं को आसमाँ का अब इशारा कोई तो हो

आँख लगते ही खुली आँखें मिलाया ख़्वाब ने पर
वो मिलें सच में कभी ऐसा नज़ारा कोई तो हो

  - Divya 'Kumar Sahab'

Fantasy Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Divya 'Kumar Sahab'

As you were reading Shayari by Divya 'Kumar Sahab'

Similar Writers

our suggestion based on Divya 'Kumar Sahab'

Similar Moods

As you were reading Fantasy Shayari Shayari