utar kar ab tere dil men main aa bhi to nahin saka | उतर कर अब तेरे दिल में मैं आ भी तो नहीं सकता

  - Divya 'Kumar Sahab'

उतर कर अब तेरे दिल में मैं आ भी तो नहीं सकता
बसे दिल में तुम्हीं मेरे दिखा भी तो नहीं सकता

भुला दो तुम अगर मुझको तुम्हें हक़ है भुलाने का
मेरी तकलीफ़ है तुमको भुला भी तो नहीं सकता

लबों से कह न पाया और वो समझे नहीं चुप्पी
इधर अपनी मैं ख़ामोशी सुना भी तो नहीं सकता

कहेंगे सब मुझे कमज़ोर तो मैंने हँसी रख ली
भरा आँसू नयन में पर बहा भी तो नहीं सकता

जगे ये नैंन मेरे तो मिले तुम ख़्वाब में मुझको
सुलाया ख़्वाब में ख़ुद को उठा भी तो नहीं सकता

  - Divya 'Kumar Sahab'

Bahana Shayari

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