ढूँढ़ने को इक नदी साहिल भटक जाए मेरा
नाम हर पल उन लबों पर बस अटक जाए मेरा
प्रेम से बादल भरा है पर बरसता ही नहीं
अब ज़रा आकर ज़मीं बादल झटक जाए मेरा
प्रेम उसका बन के सेहरा मेरे सिर पर आ सजे
उसका मंगलसूत्र बनकर दिल लटक जाए मेरा
सिर्फ़ ये जीवन नहीं हर जन्म उसके साथ हो
ज़ेहन में उसके यही सपना अटक जाए मेरा
भाग्य ने मुझको दिए काँटे वो दिल में चुभ रहे
भाग्य के पैरों तले आँसू खटक जाए मेरा
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