chali baat ghar ghar kahaanii kahaanii | चली बात घर घर कहानी कहानी

  - Lalit Mohan Joshi

चली बात घर घर कहानी कहानी
हुआ इक सुख़न वर कहानी कहानी

मेरा काम थोड़ा बहुत यार करना
जताना बता कर कहानी कहानी

रुलाने लगा है ये सारा ज़माना
यही है मुक़द्दर कहानी कहानी

दुआ है हमारी रहो ख़ुश सदा तुम
हमें जागना पर कहानी कहानी

सुनाते हैं चेहरे पे मुस्कान लाकर
मगर दिल है पत्थर कहानी कहानी

छुपा है ज़माने से सच्चा वो चेहरा
बदलते हैं चाकर कहानी कहानी

चलो अब मैं चुप ही रहूँ तो सही है
सुनाऊँ न घर घर कहानी कहानी

हमारी भी आँखों ने देखे थे सपने
मगर टूटते पर कहानी कहानी

वो सूनी सी चौखट वो ठहरी निगाहें
'अजब है ये मंज़र कहानी कहानी

कभी रौशनी की दुआ की बहुत थी
अंधेरा हुआ घर कहानी कहानी

जिसे हमने ढूँढ़ा भटकते यहाँ पर
मिला ख़ुद के भीतर कहानी कहानी

नया फूल खिलता यहाँ यार कैसे
किया जड़ को बे-घर कहानी कहानी

मुक़द्दर की रेखा यही पूछती फिर
कहाँ खो गया स्वर कहानी कहानी

ललित ने है माना ख़ुदा शायरी को
बना है वो शायर कहानी कहानी

  - Lalit Mohan Joshi

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