चली बात घर घर कहानी कहानी
हुआ इक सुख़न वर कहानी कहानी
मेरा काम थोड़ा बहुत यार करना
जताना बता कर कहानी कहानी
रुलाने लगा है ये सारा ज़माना
यही है मुक़द्दर कहानी कहानी
दुआ है हमारी रहो ख़ुश सदा तुम
हमें जागना पर कहानी कहानी
सुनाते हैं चेहरे पे मुस्कान ला कर
मगर दिल है पत्थर कहानी कहानी
छुपा है ज़माने से सच्चा वो चेहरा
बदलते हैं चाकर कहानी कहानी
चलो अब मैं चुप ही रहूँ तो सही है
सुनाऊँ न घर घर कहानी कहानी
हमारी भी आँखों ने देखे थे सपने
मगर टूटते पर कहानी कहानी
वो सूनी सी चौखट वो ठहरी निगाहें
अजब है ये मंज़र कहानी कहानी
कभी रौशनी की दुआ की बहुत थी
अँधेरा हुआ घर कहानी कहानी
जिसे हम ने ढूँढ़ा भटकते यहाँ पर
मिला ख़ुद के भीतर कहानी कहानी
नया फूल खिलता यहाँ यार कैसे
किया जड़ को बे-घर कहानी कहानी
मुक़द्दर की रेखा यही पूछती फिर
कहाँ खो गया स्वर कहानी कहानी
ललित ने है माना ख़ुदा शा'इरी को
बना है वो शाइ'र कहानी कहानी















