बुरे इस वक़्त ने जब आज़माया है
तो ख़ुद से राब्ता मैंने निभाया है
ज़माने में मुझे अक्सर मिला है दर्द
सो अपने दर्द को ताक़त बनाया है
ख़ुदा पर है भरोसा और ख़ुद पर भी
यही हथियार से ख़ुद को सजाया है
सलीक़ा ज़िंदगी का सब पिता से है
उन्हें हर मुश्किलों में साथ पाया है
यहाँ सब तल्ख़ बातें सुनके मैंने फिर
यूँँ ख़ुद मज़बूत दुनिया को दिखाया है
सबक़ हर हार से मुझको मिला ऐसा
कि अब हर हार को गहना बनाया है
बिताकर 'उम्र को मैंने यहाँ अक्सर
नए आयाम को हर दिन ही पाया है
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