वक़्त की अब चोट हम को रास ऐसे आ गई हैजबसे जीने की नई फिर आस जैसे आ गई हैज़िंदगी ज़िंदा रहे गर फूल तब पाएँगे खिलबात हम में ऐसी देखो यार कैसे आ गई है— Lalit Mohan Joshi