ग़लती सब अपनी बतानी पड़ गई
तेरी इज़्ज़त यूँ बचानी पड़ गई
हो रहा है ये अज़ल से हर दफ़ा
आशिक़ों की कम जवानी पड़ गई
यूँ निभाना पड़ गया वा'दा हमें
अपनी चाहत ही गँवानी पड़ गई
तेरी हसरत करनी थी पूरी मुझे
हसरतें अपनी दबानी पड़ गई
बात तेरी जो ग़लत थी ख़ुद मुझे
महफ़िलों में वो दबानी पड़ गई
जीत कर हारा हुआ हूँ मैं उसे
जात से बस मात खानी पड़ गई
तू मिलेगी ही नहीं बस 'देव' को
रूह अंदर से हटानी पड़ गई
— Manoj Devdutt















